एम्वे कंपनी में प्रचलित शब्दों का अर्थ :
● बिज़नेस गूप : आपके हर समूह में शामिल आपकी डाउनलाइन के सभी डिस्ट्रिव्युटर आपके विज़नेस गूप में गिने जाते हैं, लेकिन इसमें आपके नीचे प्लॅटिनम स्तर को हासिल करनेवाले डाउनलाइन डिस्ट्रिव्युटर का गूप शामिल नहीं होता•
● विज़नेस वॉल्यूम (BV) : विज़नेस वॉल्यूम का अर्थ है, आपके बिज़नेस गूप के द्वारा महीने भर में किया गया कुल कारोवार या 'टर्न ओव्हर' इसी कारोबार के आधार पर आपके कमीशन की गणना होती है और आपकी आमदनी पैदा होती है •
● कमीशन : यह आपके द्वारा किए गए प्रदर्शन के कारण मिलनेवाली आमदनी का एक हिस्सा हैं. आपके पूरे विज़नेस गूप द्वारा किए गए मासिक कारोबार के हिसाब से बनने वाले कमीशन के प्रतिशत में से, आपके हर समूह के द्वारा किए गए कारोबार के प्रतिशत को अलग अलग निकालकर, हर समूह से आपके कुल कारोवार के फर्क की धनराशि आपको कमीशन के रूप में प्रदान की जाती है•
छूट (डिस्काऊन्ट) : कंपनी के प्रॉडक्ट्स हर डिस्ट्रिब्युटर को थोक मूल्य पर प्रदान किए जाते हैं, जबकि उनका चिल्लर विक्री मूल्य ज्यादा होता है . थोक और चिल्लर बिक्री मूल्य के बीच का यह फर्क ही छूट या डिस्काऊन्ट कहलाता है, जो कि लगभग 20 प्रतिशत तक होता है•
चिल्लर विक्री मूल्य (MRP) : यह मूल्य हर प्रॉडक्ट पर प्रिंट किया हुआ होता है, मतलब उस प्रॉडक्ट को ज्यादा से ज्यादा इसी मूल्य पर बेचा जाना चाहिए. इस मूल्य में सभी तरह के टॅक्स समाहित होते हैं•
NLA : नो लॉन्गर अव्हेलेबल याने यह प्रॉडक्ट अब आगे से विक्री के लिए उपलब्ध नहीं है•
NYA : नाट यट अव्हेलेवल याने यह प्रॉडक्ट अभी तक बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हुआ है•
पॉइंट वॉल्यूम (PV) : हर प्रॉडक्ट के साथ एक निश्चित पॉइंट वॉल्यूम को जोड़ा जाता है याने खरीददार को उसके साथ निश्चित पॉइन्ट्स दिए जाते हैं. पूरे गूप को महीने भर में मिलनेवाले इन्हीं कुल पॉइन्स के आधार पर कारोबार का एक निश्चित प्रतिशत कमीशन वॉटा जाता है. (3% से लेकर 21% तक) हर देश की करेंसी का मूल्य अलग होता है, इसलिए विश्व स्तर पर समानता लाने के लिए 'पॉइन्ट वॉल्यूम' का उपयोग किया जाता है •
प्रदर्शन (परफॉर्मन्स) : यह आपके एक महीने के कारोबार या टर्न ओव्हर को दर्शाता है . सेल्स और मार्केटिंग प्लान के हिसाब से आपने अपने ग्रुप के साथ मिलकर उस पूरे महीने में जितने प्रॉडक्ट्स खरीदे हैं, उनपर मिलनेवाले पीव्ही के आधार पर आपके प्रदर्शन की गणना की जाती है. (3% से लेकर 21% तक)
● चिल्लर बिक्री पर लाभ : सभी टॅक्स जोड़कर प्रॉडक्ट आपको थोक मूल्य पर मिलता है, जबकि चिल्लर विक्री मूल्य उससे लगभग 20% तक।ज्यादा अंकित होता है. इसी 20% तक का लाभ आपको पॉडक्ट की चिल्लर विक्री करने पर मिल सकता है•
● TNA. : टेम्परिली नॉट अव्हेलेबल याने यह प्रॉडक्ट कुछ समय तक बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है •
● उत्पाद (प्रॉडक्ट्स) : पॉडक्ट का मतलब है, कंपनी द्वारा बनायी गयी हर चीज, जिसे डिस्ट्रिब्युटर के लिए उपलव्य किया जाता है. जिसमें रोजमर्रा इस्तेमाल की वस्तुएँ, उनके इस्तेमाल के लिए उपयोगी उपकरण और बिज़नेस के लिए सहायक साहित्य सामुग्री शामिल है•
● सेल्स और मार्केटिंग प्लान : कंपनी की मार्केटिंग का पूरा विवरण दर्शानवाली योजना को ही सेल्स और मार्केटिंग प्लान कहा जाता है. पारंपरिक विजनेस में विचौलियों के बीच 60% तक का बंटनेवाला लाभ, किस तरह से हर स्तर पर छूट, कमीशन और बोनस के रूप में नेटवर्क मार्केटिंग के डिस्ट्रिब्युटर्स में बांटा जाता है, इसी का विवरण सेल्स और मार्केटिंग प्लान में किया जाता है•
विजनेस में सहायक साहित्य (BSM) : नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी या सिस्टम द्वारा तैयार किया गया साहित्य, जो कि विज़नेस में मददगार सावित होता है, उसे विज़नेस सपोर्ट मटेरियल (BSM) कहा जाता है. इसमें प्रॉडक्ट वॉशर, ऑडियोव्हिडियो सीडी, किताव और विज़नेस बढ़ाने के लिए उपयोग में आनेवाली हर चीज़ का समावेश है. कंपनी या सिस्टम की अनुमति के बिना ऐसे किसी साहित्य की व्यक्तिगत निर्मिती और वितरण पर पाबंदी है•
● क्रॉस गूप सेलिंग: एक डिस्ट्रिब्युटर के द्वारा दूसरे गुप के डिस्ट्रिब्युटर को प्रॉडक्ट्स वेचना 'क्रॉस गूप सेलिंग' कहलाता है. हमें इससे बचना चाहिए•
● प्लॅटिनम : जिस डिस्ट्रिब्युटर ने कम से कम दो लेग की मदद से 21% का स्तर साल में 6 वार हासिल किया है (इसमें तीन महीने लगातार हासिल करना आवश्यक है), उसे प्लॅटिनम डिस्ट्रिब्यूटर की पिन देकर सम्मानित किया जाता है•
● डिस्ट्रिब्युटर : कंपनी का अप्लीकेशन फार्म भरकर जो व्यक्ति कंपनी के साथ विधिवत रूप से जुड़ जाता है, वो कंपनी का डिस्ट्रिब्युटर कहलाता है और वो अपने बिज़नेस के मालिक की हैसियत से स्वतंत्र होकर अपना बिज़नेस बढ़ा सकता है. कंपनी के नियमानुसार उसे विज़नेस बढ़ाने की हर सुविधा और साधन कंपनी द्वारा प्रदान किए जाते हैं •
● स्पॉन्सर : वह डिस्ट्रिब्युटर जो किसी अन्य व्यक्ति को कंपनी के साथ जोड़कर उसे अपनी ही तरह डिस्टिव्युटार होने में मार्गदर्शन करके मदद करता है, वो उस व्यक्ति का स्पॉन्सर कहलाता है



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