Monday, August 12, 2019

CHAPTER 2.2. सेहत के बहानासाइटिस से बचने के चार तरीके



सेहत के बहानासाइटिस से बचने के चार तरीके

सेहत के बहानासाइटिस से बचाव के सर्वश्रेष्ठ वैक्सीन के चार डोज़ हैं :

      1. अपनी सेहत के बारे में बात न करें। आप किसी बीमारी के बारे में जितनी ज्यादा बात करेंगे, चाहे वह साधारण सी सर्दी ही क्यों न हो, वह बीमारी उतनी ही बिगड़ती जाएगी। बुरी सेहत के बारे में बातें करना काँटों को खाद-पानी देने की तरह है। इसके अलावा, अपनी सेहत के बारे में बातें करते रहना एक बुरी आदत है। इससे लोग बोर हो जाते हैं। इससे आपको आत्म-केंद्रित और बुढ़िया की तरह बातें करने वाला समझा जा सकता है। सफलता की चाह रखने वाले आदमी अपनी “बुरी” सेहत के बारे में चिंता नहीं करता। अपनी बीमारी का रोना रोने से आपको थोड़ी सहानुभूति तो मिल सकती है (और मैं सकती शब्द पर ज़ोर देना चाहूँगा), परंतु जो आदमी हमेशा शिकायत करता रहता है, उसे कभी किसी का सम्मान, आदर या वफ़ादारी नहीं मिल सकते।

         2. अपनी सेहत के बारे में फालतू की चिंता करना छोड़ दें। डॉ. वॉल्टर अल्वरेज़ विश्वप्रसिद्ध मेयो क्लीनिक में एमेरिटस कन्सल्टेंट हैं। उन्होंने हाल ही में लिखा है, “मैं हमेशा फ़िजूल की चिंता करने वाले लोगों को ऐसा न करने की सलाह देता हूँ। उदाहरण के तौर पर, मैंने एक आदमी को देखा जिसे इस बात का पूरा विश्वास था कि उसका ‘गाल ब्लैडर' खराब है, हालाँकि आठ बार अलग-अलग क्लीनिकों में एक्स-रे। कराने पर भी उसका गाल ब्लैडर पूरी तरह सही दिख रहा था और डॉक्टरों का कहना था कि यह सिर्फ उसके मन का वहम है और दरअसल उसे कोई बीमारी नहीं है। मैंने उससे विनती की कि वह अब तो मेहरबानी करके अपने गाल ब्लैडर का एक्स-रे कराना छोड़ दे। मैंने सेहत का जरूरत  से ज्यादा ध्यान रखने वाले सैकड़ों लोगों को बार-बार जबरन ई भी कराते देखा है और मैंने उनसे भी यही विनती की है कि वे अपनी बीमारी के बारे में फालतू की चिंता करना छोड़ दें।

      3. आपकी सेहत जैसी भी हो, आपको उसके लिए कृतज्ञ होना चाहिए। एक पुरानी कहावत है, “मैं अपने फटे हुए जूतों को लेकर दुःखी हो रहा था, परंतु जब मैंने बिना पैरों वाले आदमी को देखा तो मुझे ऊपर वाले से कोई शिकायत नहीं रही, इसके बजाय मैं कृतज्ञ हो चला।” इस बात पर शिकायत करने के बजाय कि आपकी सेहत में क्या “अच्छा नहीं है, आपको इस बारे में खुश और कृतज्ञ होना चाहिए कि आपकी सेहत में क्या ‘अच्छा है। अगर आप कृतज्ञ होंगे तो आप कई असली
बीमारियों से भी बचे रहेंगे।

       4. अपने आपको यह अक्सर याद दिलाएँ “जंग लगने से बेहतर है घिस जाना।” आपको जीवन मिला है आनंद लेने के लिए। इसे बर्बाद न करें। जिंदगी जीने के बजाय अगर आप चिंता करते रहेंगे, तो आप जल्दी ही किसी अस्पताल में भर्ती नज़र आएँगे।

2.      “परंतु मेरे पास सफल लोगों जितनी बुद्धि नहीं है।” बुद्धि का बहानासाइटिस या “मेरे पास उतनी बुद्धि नहीं है” बहुत लोकप्रिय बहाना है। वास्तव में यह इतना आम है कि यह हमारे आस-पास के तक़रीबन 95 प्रतिशत लोगों में किसी न किसी रूप में मौजूद रहता है। बहानासाइटिस के बाक़ी रूपों में तो व्यक्ति बढ़-चढ़कर बातें करता है, परंतु इस क़िस्म के बहानासाइटिस यानी बुद्धि के बहानासाइटिस में व्यक्ति चुपचाप दुःखी होता रहता है। ज्यादातर लोग दूसरों के सामने यह मानने को तैयार नहीं होते कि उनमें पर्याप्त बुद्धि या समझ नहीं है। परंतु, वे अंदर से यह बात महसूस करते हैं।

         जब बुद्धि की बात आती है, तो हममें से ज्यादातर लोग दो तरह की मूलभूत गलतियाँ करते हैं :

          1. हम अपनी बुद्धि को कम आँकते हैं, और

          2. हम दूसरे व्यक्ति की बुद्धि को ज्यादा आँकते हैं।

        इन गलतियों के कारण लोग काफ़ी नुक़सान में रहते हैं। वे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने में असफल रहते हैं, क्योंकिउ“बुद्धि की ज़रूरत होती है। परंतु तभी वहाँ एक ऐसा व्यक्ति आता है जो बुद्धि के बारे में ज़रा भी विचार नहीं करता और उसे वह काम मिल जाता है।

             दरअसल महत्व इस बात का नहीं है कि आपमें कितनी बुद्धि है। बल्कि इस बात का है कि जो आपके पास है आप उसका किस तरह उपयोग करते हैं। आपकी बुद्धि की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण है वह चिंतन या वह नज़रिया जो आपकी बुद्धि को दिशा दिखा रहा है। मुझे
इस बात को दोहराने दें, क्योंकि यह बहुत ही महत्वपूर्ण है : आपकी बुद्धि की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण है वह चिंतन या वह नज़रिया जो आपकी बुद्धि को दिशा दिखा रहा है।

देश के मशहूर डॉक्टर एडवर्ड टेलर से एक बार किसी ने यह सवाल पूछा, “क्या कोई भी बच्चा वैज्ञानिक बन सकता है ?” टेलर ने जवाबदि  “वैज्ञानिक बनने के लिए तूफ़ानी दिमाग की ज़रूरत नहीं होती, न ही चमत्कारी याददाश्त की ज़रूरत होती है, न ही यह ज़रूरी है कि बच्चा स्कूल में बहुत अच्छे नंबरों से पास हो। वैज्ञानिक बनने के लिए केवल यह ज़रूरी है कि बच्चे की विज्ञान में काफ़ी रुचि हो। उसकी यह रुचि जितनी ज्यादा होगी, वह उतना ही बड़ा वैज्ञानिक बन सकता है।”

           तो रुचि या उत्साह विज्ञान में 
महत्वपूर्ण होते हैं!

         अगर 100 आई क्यू वाले किसी व्यक्ति का रवैया सकारात्मक, आशावादी और सहयोगात्मक है, तो वह उस व्यक्ति से ज्यादा पैसा, सफलता और सम्मान हासिल करेगा, जिसका आई क्यू तो 120 है, परंतु उसका रवैया नकारात्मक, निराशावादी और असहयोगात्मक है।

किसी काम में जुटे रहिए जब तक कि वह पूरा न हो जाए- यही असली पते की बात है। आलसी बुद्धि किस काम की ? अक्सर जुटे रहने वाला व्यक्ति उस बुद्धिमान और प्रतिभाशाली व्यक्ति से ज्यादा सफल होता है जो कोई काम पूरा नहीं करता है।

जुटे रहने की क्षमता ही योग्यता का 95 प्रतिशत हिस्सा है।

        पिछले साल मैं अपने कॉलेज के एक पुराने दोस्त चक से 10 साल बाद मिला। चक बहुत ही प्रतिभाशाली छात्र था और उसने ऑनर्स केसा ग्रेजुएशन किया था। जब मैं उससे आख़िरी बार मिला था, तो उसका लक्ष्य था पश्चिमी नेब्रास्का में अपना बिज़नेस खड़ा करना।

         मैंने चक से पूछा कि आखिरकार उसने किस तरह का बिज़नेस खड़ा किया है।

          उसका जवाब था, “मैं कोई बिज़नेस खड़ा नहीं कर पाया। पाँच साल पहले मैं तुम्हें यह नहीं बताता, एक साल पहले भी नहीं, परंतु अब
मैं इस बारे में बात करने के लिए तैयार हैं।” 

“अब जब मैं अपने कॉलेज के दिनों की याद करता हूँ, तो मुझे यह महसूस होता है कि मैं हर योजना की खामियाँ ढूँढने में माहिर था। मैं यह बता सकता था कि कोई बिज़नेस क्यों चौपट हो जाएगा, कोई योजना क्यों असफल हो जाएगी, राह में कितनी मुश्किलें आएंगी : 'आपके पास बहुत सारी पूँजी होनी चाहिए, 'यह सुनिश्चित कर लें कि बिज़नेस साइकल सही हो,' जो सामान हम बनाएँगे, क्या उसकी बहुत माँग है?' ‘क्या स्थानीय उद्योग स्थिर और स्थाई हैं ?'- और इसी तरह के एक हज़ार एक सवाल जिनके जवाब ढूंढे बिना कोई बिज़नेस शुरू करना खतरनाक हो सकता था।

मुझे सबसे ज्यादा कष्ट इस बात से होता है कि मेरे वे दोस्त जिनमें ज्यादा बुद्धि नहीं थी, या वे लोग जो कभी कॉलेज गए ही नहीं थे, उन्होंने अच्छे-खासे बिज़नेस खड़े कर लिए हैं। जबकि मैं वहीं का वहीं हैं, उनकी कंपनियों का ऑडिट करता फिर रहा हूँ। कोई बिज़नेस क्यों असफल हो सकता है. इसके बारे में सोचते रहने के बजाय काश मैंने यह सोचा होता। कि कोई बिज़नेस किस तरह सफल हो सकता है! अगर मैंने सकारात्मक चिंतन किया होता तो मेरी जिंदगी ज्यादा सुखद होती।"

         चक की बुद्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण था उसका सोचने का नज़रिया, जिसने चक की बुद्धि को गलत राह दिखाई। कई प्रतिभाशाली लोग क्यों असफल होते हैं ? पिछले कई सालों से मैं एक ऐसे आदमी के संपर्क में हैं जो बेहद प्रतिभाशाली है, जिसमें बुद्धि की कोई कमी नहीं है और उसका नाम है फी बेटा काप्पा। इतनी बुद्धि होने के बावजूद वह बहुत असफल है। उसकी नौकरी भी सामान्य है (वह ज़िम्मेदारियों से घबराता है)। उसने कभी शादी नहीं की (वह मानता है। कि ज्यादातर शादियों का अंत तलाक़ में होता है)। उसके बहुत कम दोस्त हैं (लोगों से बातें करना उसे बोरिंग लगता है)। उसने किसी तरह की जायदाद नहीं खरीदी है (इस डर से कि कहीं वह अपना पैसा न गंवा दे)। यह आदमी अपनी बद्धि का इस्तेमाल करके यह सिद्ध कर देता है कि चीजें क्यों असफल होंगी। इसके बजाय उसे अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके यह सिद्ध करना चाहिए कि सफल किस तरह हुआ जाए।'

        जैसा मैंने कहा उसके पास बुद्धि की कमी नहीं है, सिर्फ उसके सोचने का नज़रिया गलत है। और इसी कारण यह प्रतिभाशाली आदमी समाज को बहुत कम योगदान दे पाया है और उसने कोई रचनात्मक कार्य नहीं किया है। अगर वह अपना नज़रिया बदल ले, तो वह बड़े-बड़े काम कर सकता है। उसमें अद्भुत सफलता दिलाने वाला दिमाग़ तो है, परंतु उसका नज़रिया उतना ताक़तवर नहीं है।

मैं एक और ऐसे ही आदमी को जानता हूँ जो न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पीएच.डी. करने के बाद सेना में भर्ती हुआ। उसने सेना में तीन साल किस तरह बिताए ? स्टाफ़ ऑफ़िसर के रूप में नहीं। न ही स्टाफ़ स्पेशलिस्ट के रूप में। इसके बजाय, वह तीन साल तक सेना का ट्रक चलाता रहा। क्यों ? क्योंकि उसके मन में अपने साथी सिपाहियों के प्रति नकारात्मक विचार भरे हुए थे (“मैं उनसे श्रेष्ठ हूँ”), सेना के नियम-क़ायदों से वह चिढता था (“सारे नियम बकवास और मूर्खतापूर्ण हैं”), अनुशासन को वह पसंद नहीं करता था (“यह दूसरों पर लागू होता होगा, मुझ पर नहीं होगा”), यानी कि हर चीज़ के बारे में उसका नज़रिया नकारात्मक था, जिसमें वह खुद भी शामिल था (“मैं कैसा मूर्ख था जो इस झमेले में आ फँसा और अब यहाँ से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं ढूंढ पा रहा हैं")।

         ऐसे आदमी का आदर कौन करता ? उसका सारा ज्ञान उसके दिमाग के गोदाम में भरा रहा और वहीं दफ़न होकर रह गया। उसके
नकारात्मक विचारों ने उसे निठल्ला बना दिया था।

            याद रखें, आपकी बुद्धि की मात्रा से ज़्यादा महत्वपूर्ण है वह चिंतन या वह नज़रिया जो आपकी बुद्धि को दिशा दिखा रहा है। पीएच. डी. की डिग्री भी इस मूलभूत सफलता के सिद्धांत के सामने हार जाती है।

         कई साल पहले मैं अपने करीबी दोस्त फिल के ऑफ़िस में बैठा था। फिल एक बड़ी एडवर्टाइजिंग एजेंसी में ऑफ़िसर था। फिल अपनी एजेंसी के मार्केटिंग रिसर्च का निदेशक था और उसका काम ज़ोरदार चल रहा था।

            क्या फिल बहुत “दिमाग वाला था ? बिलकुल नहीं। फिल को रिसर्च तकनीक का ज़रा भी ज्ञान नहीं था। उसे सांख्यिकी की बिलकुल
समझ नहीं थी। वह कॉलेज प्रैजुएट भी नहीं था (हालाँकि उसके सभी मातहत कर्मचारी कॉलेज ग्रेजुएट थे)। और फिल यह दावा भी नहीं
करता था कि उसे रिसर्च के तकनीकी पहलू का ज्ञान है। तो फिर फिल में ऐसी क्या बात थी कि उसे साल भर में 30,000 डॉलर मिलते थे,
जबकि उसके मातहतों को सिर्फ 10,000 डॉलर ही मिलते थे ? 

          फिल “इंसानों” का इंजीनियर था। फिल 100 प्रतिशत सकारात्मक था। जब लोगों का उत्साह ठंडा पड़ जाता था, तो फिल उन्हें प्रेरित कर सकता था। फिल उत्साही था। वह उत्साह पैदा कर सकता था। फिल में लोगों की समझ थी और इसलिए वह सचमुच जानता था कि उनसे कैसे काम लिया जा सकता है और इससे भी बड़ी बात यह कि वह उन लोगों को पसंद करता था।

           कंपनी ने फिल को उन कर्मचारियों से तीन गुना ज्यादा बहुमूल्य समझा जिनमें उससे ज्यादा आई क्यू या दिमाग़ था। और निश्चित रूप से फिल में बुद्धि तो कम थी, परंतु उसके सोचने के तरीके या नज़रिए ने उसे कंपनी के लिए इतना मूल्यवान बना दिया था।

       कॉलेज में दाखिल होने वाले 100 में से सिर्फ 50 प्रतिशत ही पैजएट हो पाएँगे। मैं यह जानकर हैरान हुआ इसलिए मैंने एक बड़ी
यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर ऑफ़ एडमीशन से इसका कारण पूछा।

         उसने कहा, “इसका कारण कम बुद्धि नहीं है। अगर उनमें पर्याप्त योग्यता नहीं होती, तो हम उन्हें दाख़िला ही नहीं देते। और सवाल पैसे
का भी नहीं है। आजकल जो भी अपने कॉलेज की फ़ीस के लिए काम करने को तैयार है, उसके लिए काम की कोई कमी नहीं है। असली कारण है नज़रिया या रवैया। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि कितने सारे नौजवान सिर्फ इसलिए कॉलेज छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें प्रोफेसर पसंद नहीं होते, या उन्हें अपने विषय में मज़ा नहीं आता या उन्हें पसंदीदा साथी नहीं मिलते।”

नकारात्मक नज़रिए के कारण ही कई जूनियर एक्जीक्यूटिव्ज़ ऊँचे पदों पर नहीं पहुँच पाते। ऐसे हज़ारों युवा एक्ज़ीक्यूटिव्ज़ हैं जिनमें पर्याप्त बुद्धि तो है, परंतु उनका रवैया नकारात्मक, चिड़चिड़ा, निराशावादी और अपमानजनक है। जैसा एक एक्ज़ीक्यूटिव ने मुझे बताया, “ऐसा दुर्लभ ही है कि हम किसी युवा ऑफ़िसर को दिमाग़ या बुद्धि की कमी के कारण प्रमोशन नहीं देते। लगभग हमेशा इसका कारण होता है उसका रवैया या नज़रिया।"

         मुझे एक बीमा कंपनी ने एक रिसर्च करने को कहा। वे यह जानना चाहते थे कि उनके चोटी के 25 प्रतिशत एजेंट 75 प्रतिशत बीमा करने में सफल क्यों हो रहे हैं, जबकि सबसे नीचे के 25 प्रतिशत एजेंट कुल बीमे का सिर्फ 5 प्रतिशत ही क्यों कर पा रहे हैं। इसका कारण क्या था ?

         हज़ारों फ़ाइलों को गौर से देखा गया। इस रिसर्च में एक बात उभरकर आई कि सबसे चोटी के और सबसे निचले बीमा एजेंटों की बुद्धि में कोई ख़ास अंतर नहीं था। उनकी सफलता में अंतर का कारण उनकी शिक्षा का अंतर भी नहीं था। बेहद सफल और बहुत असफल लोगों में जो सबसे बड़ा अंतर पाया गया, वह था उनके रवैए या नज़रिए का चोटी के बीमा एजेंट चिंता कम करते थे, ज्यादा उत्साही थे, लोगों को सचमुच पसंद करते थे।

        हम अपनी बुद्धि की मात्रा को तो बदल नहीं सकते, परंतु हम उस तरीके को तो बदल ही सकते हैं जिससे हम अपनी बुद्धि का इस्तेमाल
करते हैं।

          ज्ञान ही शक्ति है- अगर आप इसका रचनात्मक प्रयोग करें। बुद्धि के बहानासाइटिस से जुड़ी हुई एक गलत धारणा यह है कि ज्ञान ही शक्ति है। परंतु यह बात पूरी तरह सही नहीं है, यह केवल आधी सही है। ज्ञान केवल संभावित शक्ति है। ज्ञान शक्ति तभी बनता है जब इसका उपयोग किया जाता है और सिर्फ तभी, जब यह उपयोग सकारात्मक या रचनात्मक हो।

         एक बार महान वैज्ञानिक आइंस्टीन से किसी ने पूछा कि एक मील में कितने फुट होते हैं। आइंस्टीन ने जवाब दिया, “मुझे नहीं मालूम। मैं अपने दिमाग़ में ऐसी जानकारी क्यों भरूं जो मैं किसी भी किताब से दो मिनट में हासिल कर सकता हूँ?"

    आइंस्टीन ने हमें एक बड़ा सबक़ सिखाया है। उनका मानना था कि हमें अपने दिमाग को तथ्यों या जानकारी का गोदाम बनाने से बचना चाहिए और इसके बजाय यह ज्यादा महत्वपूर्ण था कि हम अपने दिमाग से सही तरीके से सोचें।

         एक बार हेनरी फ़ोर्ड ने शिकागो ट्रिब्यून पर मानहानि का मुकदमा ठोंक दिया। कारण यह था कि उस अखबार ने फ़ोर्ड को अज्ञानी कह दिया था। फ़ोर्ड ने उनसे यह “सिद्ध करने को कहा।

     ट्रिब्यून ने फ़ोर्ड से दर्जनों सवाल पूछे, जैसे “बेनेडिक्ट अर्नाल्ड कौन थे ?”, “क्रांति का युद्ध कब लड़ा गया था ?” इत्यादि। और फ़ोर्ड ज्यादातर सवालों के जवाब नहीं दे पाए, क्योंकि उनकी औपचारिक शिक्षा कम हुई थी।

     आखिरकार फ़ोर्ड काफ़ी परेशान होकर गुस्से से बोले, “मैं इन सवालों के जवाब तो नहीं जानता, परंतु मैं पाँच मिनट में ऐसे आदमी को ढूँढ़ सकता हूँ जो इन सारे सवालों के जवाब जानता हो।” 

    हेनरी फ़ोर्ड ने फालतू की जानकारी हासिल करने में कभी रुचि नहीं ली। उन्हें वह बात मालूम थी जो हर सफल एक्ज़ीक्यूटिव जानता है : दिमाग को तथ्यों का गैरेज मत बनाओ, यह जानकारी रखो कि जानकारी कहाँ से हासिल हो सकती है।

     तथ्यों के आदमी का मोल क्या है ? मैंने एक दोस्त के साथ एक बहुत रोचक शाम गुज़ारी। मेरा दोस्त एक नई परंतु तेज़ी से बढ़ रही कंपनी का प्रेसिडेन्ट है। टीवी पर एक लोकप्रिय क्विज़ कार्यक्रम आ रहा था। जिस आदमी से सवाल पूछे जा रहे थे, वह पिछले कुछ सप्ताहों से लगातार आ रहा था। वह सभी तरह के सवालों के जवाब दे सकता था, चाहे उनमें से कुछ सवाल कितने ही मूर्खतापूर्ण क्यों न हों।

         जब उस आदमी ने एक बहुत मुश्किल सवाल का जवाब दिया जिसका संबंध अर्जेन्टीना के किसी पहाड़ से था, तो मेरे दोस्त ने मुझसे
कहा, “तुम्हें क्या लगता है कि मैं इस आदमी को कितने डॉलर की नौकरी दूंगा?"

"कितने की?", मैंने पूछा।

      "300 डॉलर से एक सेंट भी ज्यादा नहीं- प्रति सप्ताह नहीं, प्रति माह भी नहीं, बल्कि जीवन भर। मैंने उसके ज्ञान की थाह ले ली है। यह 'विशेषज्ञ' सोच नहीं सकता। वह केवल रट सकता है, याद कर सकता है। वह एक इंसानी एन्साइक्लोपीडिया है और मैं समझता हूँ कि मैं 300 डॉलर में एक अच्छा एन्साइक्लोपीडिया ख़रीद सकता हूँ। वास्तव में, शायद यह क़ीमत भी उसके लिए ज़्यादा होगी। इस आदमी को जितना पता है, उसका १० प्रतिशत हिस्सा तो मुझे 2 डॉलर की जनरल नॉलेज की किताब में ही मिल जाएगा।

“मैं अपने आस-पास ऐसे लोगों को चाहता हूँ जो समस्याएँ सुलझा सकें, जिनके पास विचार हों। जो सपने देख सकें और फिर उन सपनों को साकार कर सकें। जिस आदमी में विचार हैं वह मेरे साथ पैसे कमा सकता है, जिसके पास सिर्फ़ तथ्य हैं, वह मेरे साथ पैसे नहीं कमा पाएगा।"

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