चौथा आधारभूत कार्य : फोलो अप या फोलो थ्रू
सभी चरणों की तुलना में फोलो अप और फोलो थू की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि एक सफल और अच्छी आमदनी देने वाले इस बिज़नेस की शुरूआत करने का निर्णय अधिकतर प्रॉस्पेक्ट्स के द्वारा फोलो अप के बाद ही लिया जाता है . साधारणतः नए प्रॉस्पेक्ट द्वारा बिज़नेस में शामिल होने के बाद ही फोलो अप पूरा होता है. जब उन्होंने मार्केटिंग प्लान देख लिया है, तब हमारा अगला कदम क्या होना चाहिए ? प्रॉस्पेक्ट की दिलचस्पी, उनकी व्यस्तता और अन्य चीज़ों पर यह निर्भर करता है. हमारा उददेश्य होना चाहिए, कि जिस व्यक्ति या दंपत्ति को मार्केटिंग प्लान दिखाया गया है, फोलो अप के लिए उनसे संभवतः जल्दी ही मिलें (48 घंटों के भीतर ही मिलना बेहतर है). तब तक बिज़नेस प्लान और उसके आँकड़े, उनके दिमाग में एकदम ताज़ा होते। हैं. इससे पहले कि अन्य लोगों से मिलकर, इस बिज़नेस के बारे में उन्हें नकारात्मक बातें सुनने का मौका मिले, हमें उनसे मिलकर उन तक सकारात्मक जानकारी पहुँचानी चाहिए. फोलो अप की प्रक्रिया कम समय में, एक-दो दिनों में ही पूरी होनी चाहिए, मगर कभीकभी यह कुछ दिन से लेकर कुछ सप्ताह तक भी चल सकती है। कई बार ऐसा होता है, कि आपको अपने परिपेक्ट के साथ कई महिनों या एकाध वर्ष तक फोलो यू करना पड़ सकता है. तब आपको उनसे घनिष्ठता वढ़ाकर, मित्रता करके और उनके सपनों को उभारकर, उन्हें नई जानकारियां देते रहना चाहिए. यह प्रक्रिया तव लक चलती है, जब तक सही वक्त न आ जाए या परिस्थितियां बदल जाएँ, ताकि वो विज़नेस में जुड़ने का निर्णय ले सकें .
फोलो अप के लिए कुछ सामान्य सुझाव :
● फोलो अप . प्लान ख़त्म होने के तुरंत बाद, अपने प्रॉस्पेक्ट से फोलो अप के लिए मुलाकात का समय निश्चित कीजिए. बेहतर होगा कि अगले 48 घंटों के भीतर ही फोलो अप को पूरा कर लीजिए.
● अपलाइन की मदद. फोलो अप का काम आप खुद भी कर सकते हैं या अपने स्पॉन्सर की या उस व्यक्ति की मदद भी ले सकते हैं, जिसने प्लान दिखाया है.
● दोस्ती कायम कीजिए. लोगों में सच्ची दिलचस्पी लेकर आप उनके साथ रिश्ता कायम कर सकते हैं, रिश्ता जितना गहरा होगा, उतना ही विश्वास और सम्मान आप जीत पाएंगे और उतना ही ज्यादा लोग आपकी बातें सुनने के लिए, आपकी बतायी राह पर चलने के लिए राजी होंगे.
● सपने जगाइए , याद रखिए कि इस बिज़नेस को करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है, लोगों के सपने . सपनों से ही उत्साह बढ़ता है और काम करने की इच्छा बलवती होती है. इसलिए उनके सपनों को समझने का, उन्हें जगाने का प्रयास कीजिए
● जानकारी दीजिए. बिना किसी ठोस जानकारी के, केवल हवा में कोई भी समझदारी भरा निर्णय नहीं ले सकता . बिजनेस की जानकारी होने से आपसी समझ बढ़ती हैं. आपसी समझ लोगों को तब ज्यादा आकर्षित करती है, जब वो इस विश्वास के साथ जड़ी हो, कि सपनों को हासिल किया जा सकता है.
फोलो अप के दौरान अक्सर सुनी जानेवाली संभावित आशंकाओं के लिए कुछ सटीक जवाव :
सवालों का स्वागत कीजिए, क्योंकि वो उनकी दिलचस्पी की ओर इशारा करते हैं. लोगों की शंकाओं का सम्मान कीजिए. उनकी शंकाओं को खुले दिल से स्वीकार कीजिए और उनकी शंकाओं को ही उनके बिजनेस करने की वजह' में बदल दीजिए. लोगों के सवालों के जवाब देने के लिए "फील, फेल्ट, फाऊंड' के सिद्धांत को अपनाइए.
आपत्तियों के जवाब :
1) " मेरे पास समय नहीं है.”
दरअसल इसी वजह को ध्यान में रखकर हमने आपसे इस बिज़नेस की बात की थी ..., क्योंकि इस बिज़नेस को सफलता पूर्वक अपेक्षातः कम समय लगाकर किया जा सकता है. समय के बहुगुणित होने के कारण यह बिज़नेस उन लोगों के लिए तो बहुत ही अच्छा है, जिनके पास काम करने के लिए कम समय होता है. इस बिज़नेस में बहुत से ऐसे लोगों ने सफलता हासिल की है, जिन्होंने अपने सीमित समय को इस बिज़नेस में बुध्दिमानी से लगाया था . वास्तव में देखा जाए, तो महत्वाकांक्षी लोगों के लिए लम्बे समय में, अधिक धन और समय कमाने का एक सुनहरा अवसर इस बिज़नेस में छुपा हुआ है.
2) "में तो ज्यादा लोगों को नहीं जानता."
मान लिजिए कि एक व्यक्ति का नाम लिखने के लिए आपको 100 रूपए दिए जाएँ, तब आप कितने लोगों के नाम गिना सकते हैं ? ज्यादा लोगों को जानना इस बिजनेस के लिए बहुत अच्छा है . मगर इस बिज़नेस की विशेषता यही है, कि इसमें अगर आप ज्यादा लोगों को नहीं भी जानते, तब भी आप एक बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं. इसके लिए आपको इतना ही करना है, ऐसे कुछ लोगों की तलाश कीजिए, जिनकी पहचान ज्यादा लोगों के साथ है.
3) "भन तो सेल्समैन हूँ और न मैं वैसा काम कर सकता हूँ.”
“फील, फेल्ट, फाऊंड' का उपयोग कीजिए. में आपकी बात को समझ सकता हैं. शुरूआत में मुझे भी ऐसा ही लगा था. लेकिन बाद में मैंने पाया, कि सौभाग्य से मेरी अपलाइन टीम इसके लिए मदद हेत आगे आती है, मुझे तो सेल्समैन की तरह काम करने की कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी . हम विशेष तौर पर किसी सेल्समेन की तलाश नहीं करते . सभी तरह के लोग और व्यवसायी इस बिज़नेस में सफलता हासिल कर चुके हैं.
4) " में अपने परिवार का समय इसमें नहीं लगा सकता."
आपने बहुत अच्छी बात कही . देखिए यह एक पारिवारिक विजनेस है. इस बिज़नेस को हम अपने परिवार के साथ मिलकर ही कर सकते हैं, इसलिए हमारे परिवार में आत्मीयता और बढ़ जाती है. अपने बच्चों के भविष्य की चिंता और परिवार के साथ अधिक समय बिताने की चाहत ही. इस विज़नेस को करने की सवसे बड़ी वजह बन सकती है.
5) " मेरे पास पैसे नहीं हैं.”
इस विज़नेस को केवल नाममात्र धन के निवेश से ही शुरू करने किया जा सकता है. यदि आपके पास निवेश के लिए धन की कमी है, तब तो यह विज़नेस आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है. आपकी यही कमी, इस बिज़नेस को हर हालत में करने के लिए, आपकी सबसे बड़ी वजह बन सकती है.
6) “यह तो संतृप्त (सतुरातए) होने जा रहा है. (याने कुछ ही समय बाद सभी लोग इसमें जुड़ चुके होंगे.)
हर दिन जितने लोग एम्वे विज़नेस शुरू करते हैं, उससे कई गुना ज्यादा लोग 18 वर्ष की आयु में प्रवेश करते हैं. इस हिसाब से चाहे कितनी भी तेजी से हमारा विजनेस नेटवर्क बढ़ता रहे, वो बढ़ती आबादी की रफ्तार से पार नहीं पा सकता . इसलिए विज़नेस के संतृप्त होने की कोई संभावना ही नहीं. वैसे आप अपने करीबी दोस्तों को हंसकर यह जवाब भी दे सकते हैं, "एक बात तो निश्चित है यार, कि जब तक तुम बिज़नेस से जुड़ नहीं जाते, कम से कम तव तक इसके संतृप्त होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता .”
7).“यह मेरे लिए नहीं है.” या “यह चाय की प्याली मेरे लिए नहीं है."
मैं आपकी बात का मतलब समझ नहीं पाया . आखिर कौनसी बात आपके लिए नहीं है, धन कमाना या औरो की मदद करना ?
■ याद रखिए कि लोगों की शुरूआती आपत्तियाँ, एहतराज़ या विरोध, उनकी अधिक जानकारी न लेने की या बिज़नेस न करने की, असली वजह नहीं होते . साधारणतः लोगों का असली एहतराज़ उनकी अपनी हैसियत या अपने डर की वजह से होता है. कुछ लोग अपनी कमज़ोर आत्मछवि के शिकार होते हैं या उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है. वास्तव में लोग केवल दो ही सवालों के जवाब पाना चाहते हैं, पहला, “क्या यह बिज़नेस वास्तव में चलता है ?” और दूसरा, “क्या मैं भी इसमें सफल हो सकता हूँ ?” मगर लोग यह दोनों वास्तविक सवालों को कभी सीधे नहीं पूछते . हम कभी भी अवास्तविक सवालों के जवाब देकर, उन्हें उनके वास्तविक डर से मुक्त नहीं कर सकते . इसलिए हमें इन वास्तविक सवालों के जवाब ही देने चाहिए.



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