Monday, April 22, 2019

तीन सूचियों बनाइए:

          तीन सूचियों बनाइए:

   स्थानिक सूची

     इस सूची में 200 किलोमिटर की परिधि में रहने वाले या आपके निवास । एक-दो घंटे के अंला पहनाले अपने स्थानिय परिचितों के नाम लिखे होने चाहिए. शुरूआत में इशी सूची की मदद से आप अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं.

  दूरस्थ सूची

२00 किलोमिटर से दूर, दूसरे शहरों में रहने वाले, अपने परिचितों के नाग इस सूची में शामिल कीजिए. जत नज़दीक रहनेवालों के साथ काम करने हुए आप कुशल हो जाएंगे, तत निश्चित ही आप अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए, दूसरे शहरों में बसे अपने परिचितों में भी संपर्क करना चाहेग,

अन्तर्राष्ट्रीय सूची

      अगर आप दूसरे देशों में बसे लोगों को जानते हैं, तब उनका नाम इस सूची में शामिन कीजिए. अपनी अपलाइन से मिलकर जानकारी लीजिए, कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को किस तरह से स्पांसर किया जा सकता है. अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए आपकी अपलाइन की मदद महत्वपूर्ण साबित होगी. इस किताब में दी गई संबंधित जानकारियों को पढ़िए. इस विषय की अधिक जानकारी आपको विट दाइ की वेबसाइट www.bww.com पर भी मिल सकती है.

सूची बनाने की तकनीक

      फ्री असोसिएशन सूची बनाने की तकनीक : इस तकनीक से आपको कम से कम समय में अच्छे पॉस्पेक्ट्स की एक बड़ी सूची बनाने और उसे बढ़ाने में मदद मिलती है. इसकी मदद से लोगों के नामों की सूची उनके व्यवसाय के हिसाब से बनाना बहुत आसान हो जाता है. नीचे दिए गए। 'मेमोरी जागर्स (रिमाइंडर्म) का उपयोग कीजिए और आपके दिमाग में जो नाम पहले आता जाए, उसे एक के बाद एक, नोट करते जाइए. नामों को । लिखते समय कोई भी पूर्वाग्रह मत रखिए.

         यदि आप यह काम अपनी डाउलाइन के लिए कर रहे हैं, तब नए डिस्ट्रिब्यूटर को खुद ही सोचकर नाम लिखने चाहिए, जिससे उनका
दिमाग स्वतंत्र होकर, किसी रूकावट के बिना काम करेगा. आपको 'मेमारी जॉगर' का उपयोग करके नामों को पुकारना चाहिए तथा नाम लिखते जाना चाहिए, अपनी डाउनलाइन को तनावमुक्त महसूस करने दीजिए और सहजता से प्रतिसाद देने दीजिए. जयं आप उनसे कोई सवाल पूछे या मेमोरी जांगर' में से कोई नाम पुकारे, तब उनके दिमाग में आनेवाल पर नाम को उन्हें ही बताने दीजिए, ना आप किसी दम्पत्ति के साथ नामों की सूची बना रहे हो, तो दोनों के साथ अलगअलग बैठकर मूची बनाइए और बाद में दोनों गुचियों को मिलाकर एक अंतिम सूची बनाइए. यह काम पूरा होने के बाद भी, नागों का आकलन करके, उस सूची में से उन्हें कांटछांट करने से रोकिए, नीचे मेमोरी जॉगर्स और सामान्यतः उपयोग में आनेवाले । कुछ नागों की सूची दी गई है, जिनको आप आगेपीछि करके भी उपयोग में ला सकते हैं।


   सूची तैयार करने के बाद महत्वपूर्ण है कि:

1. मूचियों को मिला लीजिए. यदि दम्पत्ति हैं तो दूसरी बार लिखे नाम को निकाल दीजिए.

2. नामों के आगे फोन नंबर लिखिए.

3. लोगों के नामों को, स्थानिय दूरी और अंतर्राष्ट्रीय दूरी के आधार पर प्राथमिकता दीजिए.

4. अपने नए डिस्ट्रिब्युटर को यह बता दीजिए, कि यह सूची बनाने का काम उनको सूची बनाने में मदद करने के लिए ही किया गया है। इसी पक्रया को आगे भी शुरू कर, और नामों को जोड़ते हुए, सूची बढ़ाने के लिए उनको पोल्साहित कीजिए.

अपनी सूची को बढ़ाना :

          जव आप अपनी सूची के लोगों को विज़नेस प्लान दिखाना शुरू करेंगे, तब आपकी सूची खाली होना शुरू हो जाएगी. ऐसा कभी नहीं
होगा, कि इस सूची में शामिल सभी लोग, इस विजनेस में शामिल होने के लिए तैयार हो जाएं. जब आपकी सूची खत्म होने पर आएगी, तब आपको नई सूची की ज़रूरत होगी, जिसका मतलब है कि आपने अपनी सूची को हमेशा बढ़ाते रहना चाहिए. सभी सफल डिस्ट्रिब्युटर्स, ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ मिलकर, वहुत बड़ा नेटवर्क बनाते हैं और सूची में नए नामों को जोड़ते चले जाते हैं, साथ ही साथ लोगों को प्लान भी दिखाते रहते हैं.

प्रॉस्पेक्टिंग :

      शुरूआत में प्रॉस्पेक्टिंग असुविधाजनक लग सकती है, विशेष रूप से उन लोगों को, जो सोचते हैं कि वो वातचीत शुरू करना नहीं जानते.
आप यह जान लेंगे कि नए लोगों से बातचीत शुरू करना, लोगों के मन की बात तक पहुंचना और फिर नए दोस्त बनाना, एक आसान काम है.
| व्यावसायिक और व्यक्तिगत संपर्को को विकसित करके जानकारी, समर्थन, सिफारिश और संदर्भ हासिल करने के रूप में नेटवर्किग को
परिभाषित किया जा सकता है. इसे लोगों के साथ संपर्क बनाने और उनका उपयोग करने की कला के रूप में भी परिभाषित किया गया है. उपयुक्त लोगों के साथ सम्मेलनों, समारोहों, और सभाओं में संपर्क बढ़ाने की यह एक प्रक्रिया है. एक नेटवर्कर के लिए, हर अजनवी में नया दोस्त बनाने और दूसरे प्रॉस्पेक्ट्स पाने का एक सुअवसर छुपा होता है. एक बार जब आप पॉस्पेक्टिंग में कुशलता हासिल कर लेते हैं, तब आपको स्पष्ट रूप से समझ में आ जाता है, कि प्लान दिखाने के लिए लोगों की कमी नहीं है, यह सव विजनेस बढ़ाने में निश्चित ही आपके लिए मददगार साबित होगा .

प्रॉस्पेक्टिग कैसे शुरू करें ?

1)अपनी अपलाइन द्वारा सुझाई गई पॉस्पेक्टिग से संबंधित अलगअलग ऑडियो सीडी और कैसेट्स को सुनना शुरू कीजिए.

2)अपने स्पॉन्सर या अपनाइन के साथ रहें और उनके काम करने के ढंग से सीखिए . तव आप जान पाएंगे, कि वो कितनी आसानी से इस काम को करते हैं.

3)आप सम्मेलनों में इस बिज़नेस से जुड़े लोगों के साथ मिलकर उन्हें अपना दोस्त बनाने से शुरूआत कीजिए. इससे आपको प्रॉम्पेक्ट के साथदोस्ती बनाने में आसानी होगी .

4)लोगों को 'चेक इंटस्ट' की सूची में जारी किए गए टेप्स और सीडी सुनने के लिए देना शुरू कीजिए, और इन टेप्स को अपना काम करने
दीजिए .

5)लोगों को यह जानने दीजिए, कि बिजनेस बढ़ाने के लिए होशियार, महत्वकाक्षी और विश्वसनीय लोगों को शामिल करने के लिए ह,आपकी तलाश चल रही है.

6) लोगों से बातचीत करते समय, यह जानने की कोशिश कीजिए, कि क्या वो अतिरिक्त आय कमाना चाहते हैं, अपनी आय में विविधता लाना  चाहते हैं, या खुद का नया बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं?

प्रॉस्पेक्टिग के लिए सुझाव

1) अपनी सूची में उन लोगों का नाम जोड़ने की कोशिश कीजिए, जो कि सामाजिक और आर्थिक स्तर में आपके समान या आपस ऊपर हों

2) यह बात याद रखें कि इस विज़नेस से मिलनेवाली हर चीज लोगों को चाहिए

3)आप जहां भी जाएँ, लोगों के साथ बातचीत करने का अभ्यास कीजिए

4)लोगों के संबंध में जागरूकता रखिए.

5) ऐसा नज़रिया अपनाइए, जिससे लगे कि आप केबल दोस्ताना बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं

6) अपना यह लक्ष्य बना लीजिए, कि हर दिन कम से कम एक नए व्यक्ति से आप मिलेंगे

7) लोग काटने के लिए नहीं दौडते. इसलिए यह तर अपने दिल से निकाल दीजिए. जितने ज्यादा लोगों से आपकी मुलाकात होगा, यह काम उतना ही आसान होता जाएगा. इसलिए सहजता से मुलाकात कीजिए।

8) शुरूआती संपर्क के समय अगर कोई गलती हो जाए, तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं है.

9) जव आपको यह बात समझ जाती है, कि लोगों को अपना विजनेस प्लान दिखाकर, वास्तव में आप उनके ही लाभ की बात कर रहे हैं, तव 
लोगों से बात करना आसान हो जाता है.

10)लोगों के साथ मस्कराकर 'हाय-हॅल्लो' कीजिए. आपके हावभाव से दीखना चाहिए, जैसे आप कह रहे हों, में आपको पसंद करता , में
आपका शुभचिंतक हूँ, दोस्त हूं."

11) लोगों में दिलचस्पी लीजिए.

12) उनके व्यक्तित्व और पहनावे में प्रशंसा करने लायक किसी बात की तलाश कीजिए और उसकी दिन से पशंसा कीजिए.

13)किसी ऐसे विषय को खोजिए, जो आप दोनों के लिए दिलचस्प हो और उसी विषय पर चर्चा शुरू कीजिए

14) याद रखिए, लोग केवल अपने अपने परिवार, अपने विचारों इत्यादि के बारे में ही बातें करना पसंद करते हैं. इसलिए उनके विषय में ही बातें करना बेहतर होता है.

15)लोगों द्वारा शुरू किए गए विषय पर ही चर्चा कीजिए याने विषयांतर करने से बचिए. उनसे प्रश्न पूछिए और उन्हें ही बातचीत करने 
- दीजिए.

16)लोगों के साथ गपशप करना सीखिए, बातचीत बंद करवानेवाले छोटे जवायों को अच्छी नजर से नहीं देख जाता.

17) एफ. ओ. आर. एम. (फमिली, ऑक्युपेशन, क्रिएशन, मनी/मसेजयाने परिवार, वर्तमान व्यवसाय, मनोरंजन, धन) को अपनी
वातचीत का आधार बनाइए.

18)अपना विज़नेस कार्ड हमेशा तैयार रखिए, ताकि उन्हें तुरंत दिया जा सके .

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Saturday, April 20, 2019

पहला आधारभूत कार्य: नामों की सूची बनाना

        पहला आधारभूत कार्य: नामों की सूची बनाना

              यह बिजनेस सही अर्थों में लोगों का बिजनेस है. यह बिजनेस पूरी तरह से उसी प्रकार के लोगों पर निर्भर करता है, जो लोग समूह बनाते हैं. इस बिज़नेस को सफलतापूर्वक करने के लिए आपके पास एक सही सूची का होना आवश्यक है, ताकि आप एक अच्छे समूह का निर्माण कर सके. ऐसा इसलिए, क्योंकि जब आप लोगों को मार्केटिंग प्लान दिखाएंगे, तब जरूरी नहीं कि सभी लोग आपसे इस विज़नेस में जुड़ जाएँगे. कुछ लोग आज आपसे जुड़ेंगे, उनमें से भी कुछ ही लोग बहुत बड़ा बिज़नेस खड़ा कर पाते हैं, जबकि बाकी लोग छोटामोटा ही विज़नेस कर पाएंगे . कई बार ऐसा भी होता है, कि कुछ लोग इस विज़नेस से जुड़ते तो हैं, मगर वो बीच में ही इसे छोड़ भी सकते हैं. ऐसी संभावनाओं के कारण यह बहुत ज़रूरी है, कि आप इस बिज़नेस के अवसर को, ज़्यादा से ज्यादा लोगों को, पेशेवर तरीके से समझाएँ. आप जितने ज्यादा लोगों से मिलेंगे, उतने ही बेहतर परिणाम पाएँगे.

         नामों की सूची बनाना :  साधारणतः यह देखा गया है, कि इस बिज़नेस से जुड़नेवाले नए डिस्ट्रिब्युटर्स नामों की सूची तैयार करने और फोन नंबर लिखने की बात पर ध्यान नहीं देते, क्योंकि तब उन्हें लगता है, कि इसकी आवश्यकता नहीं है. कुछ लोगों की धारणा हैं, कि उनकी तो पूरी सूची उनके दिमाग में ही है, या फिर उनके परिचितों के सारे नाम तो 'एड्रेस बुक' में लिखे मिल ही जाएँगे . वो इस बात के महत्व को समझ नहीं पाते, कि इस बिज़नेस के लिए नामों की सूची विशेषतौर पर बनाना क्यों ज़रूरी है. यदि आप अपने इस बिज़नेस को ऊँचाइयों तक ले जाना चाहते हैं, तब आपको समय निकलना ही चाहिए, उन संभावित लोगों के नामों की सूची बनाने के लिए, जिनके साथ मिलकर आप बहुत बड़ा विज़नेस खड़ा कर सकते हैं।

            यदि आपको एकदम से नामों की बड़ी सूची बनाना मुकिल लग रहा हो, तव अपने परिचित लोगों के नामों की लिखित सूची बनाने में आप अपने अपलाइन स्पांसर से मदद ले सकते हैं, उनसे सीख सकते हैं. नामों की लिखित सूची बनाने पर इसलिए जोर दिया जाता है, क्योंकि मानवीय मस्तिष्क में याद रखने की क्षमता सीमित होती है, वैसे भी नागों की सूची को दिमाग में बनाए रखने के लिए, याददारले एक कमज़ोर चौकीदार है, सूची बनाने का सबसे उत्तम तरीका है, कि उसे दो मुख्य शेणयों में विभाजित किया जाए। प्राथमिक पॉस्पेक्ट्स और दलीय पॉस्पेक्टस, जिन्हें हम आगे चलकर उपश्रेणियों में भी विभाजित कर सकते हैं .

प्राथमिक प्रॉस्पेक्ट्स :

इस श्रेणी में उन लोगों के नाम आएँगे, जिनसे आप अछी तरह से परिचित हैं, उदाहरणार्थ:

• दोस्त और रिश्तेदार

• भूतपूर्व और वर्तमान पड़ौसी

• स्कूल के यारदोस्त ।

• सहकर्मी या व्यापार में सहयोगी

• परिचित लोग

  द्वितीय पॉस्पेक्ट्स :

       इस श्रेणी की सूची में उन लोगों के नाम लिखे जाते हैं, जिन्हें आज आप अच्छी तरह से नहीं जानते, लेकिन भविष्य में प्रयास करके उनसे
परिचय और मित्रता को बढ़ाया जा सकता है. विशेष बात यह है कि इसी श्रेणी में आपकी सबसे बड़ी सूची की संभावनाएं छुपी हुई है. संभावना यही भी है, कि भविष्य का डायमंड आपको इसी श्रेणी में मिलेगा . सबसे बड़ी सच्चाई यही है, कि अजनबी लोग ही इस बिज़नेस के लिए सबसे बड़ा स्त्रोत होते हैं, इसलिए नए लोगों से मिलते समय, अपने आपको हमेशा आत्मविश्वासी और सहज बनाए रखिए. इन लोगों के साथ आपको ऐसे अवसर मिल सकते हैं, जो इस विज़नेस की वात छेड़ने के लिए आवश्यक हैं. इसमें कला इतनी ही हैं, कि आप लोगों द्वारा कही गयी बातों को ध्यान से सुनें और उनसे बातचीत करते समय उनकी दिलचस्पी से संबंधित सवाल ही पूछिए , अजनबियों को अपना दोस्त बनाने हेतु नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं.

1) लोगों को समझने के लिए उनमें दिलचस्पी लेने की आदत को विकसित कीजिए.

2)यदि आप रेस्तरां, शॉपिंग सेंटर, ब्यूटी पॉर्नर, जिम और अन्य स्थानों पर जाते हैं, तो आपको कई नए लोगों से मिलने और परिचय
बढ़ाने का अवसर मिलेगा. सभी के साथ सहयता विकसित करने की आदत बना लीजिए.

3)हर व्यक्ति को इस सम्भावना के नज़रिये से देखिए की वो इस विज़नेस में आपके साथ जुड़ चुका है या फिर जुड़नेवाला है .

4) किसी भी व्यक्ति के बारे में पूर्वाग्रह न रखें और किसी भी व्यक्ति का नाम सूची में से यह सोच कर न काट दें, कि वो इस बिजनेस
में दिलचस्पी नहीं लेगा .

          अक्सर हम यह सोचते हैं, कि कुछ लोग इस बिज़नेस को नहीं करेंगे, क्योंकि यह उनकी पसंद का काम नहीं हैं, या कि वो तो पहले से ही अपने जीवन में सफल हैं, या वो हमे अनुचित जवाब दे सकते हैं. हमें अपने दिमाग से इस तरह के पूर्वाग्रहों को निकाल देना चाहिए, क्योंकि सबसे पहली बात तो यही है, कि यह बिज़नेस सबके लिए है और सभी तरह के लोग इस विज़नेस का सफलतापूर्वक निर्माण कर रहे हैं. दूसरी बात यह कि जो लोग अपने वर्तमान व्यवसाय में सफल हैं, वो और भी बेहतर काम करना चाहते है और कर सकते हैं. सभी लोग निरंतर बढ़नेवाली सुरक्षित आमदनी, अधिक फुरसत के पल, और अन्य लाभ चाहते हैं . इसीलिए बेहतर यही होगा, कि लोगों को प्लान देखकर, उन्हें खुद ही अपना निर्णय लेने दीजिए, कि वो इस विज़नेस को करना चाहते हैं या नहीं . वेहतर होगा कि लोगों को उनका फैसला खुद ही लेने दें, बजाय इसके कि आप उनके हिस्से का फैसला लें . हमेशा याद रखिए, कि यदि आज आप उन्हें प्लान नहीं दिखाएंगे, तब आज नहीं तो कल कोई और उन्हें इस बिजनेस के बारे में बताएगा .

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Thursday, April 18, 2019

नेटवर्क मार्केटिंग बिज़नेस निर्माण के आधार

             नेटवर्क मार्केटिंग बिज़नेस निर्माण के आधार

1. नेटवर्क का निर्माण

2. नेतृत्व (लीडरशीप)

3. कारोबार बढ़ाना

            नेटवर्क मार्केटिंग विज़नेस में मुख्यतः टीम का निर्माण और प्रॉडक्ट की बिक्री पर ध्यान दिया जाता है. इस बिज़नेस में टीम बनाने के पीछे। मुख्य उद्देश्य है, समय तथा धन को वहगुणित करना . हर एक व्यक्ति के पास काम करने के लिए सीमित समय ही उपलब्ध होता है. अगर उस । व्यक्ति के साथ, उसकी डाउनलाइन टीम के लोग मिलकर काम करें, तो काम का समय बहगुणित हो जाता है . उदाहरणार्थ यदि एक व्यक्ति रोज़ 2 घंटे इस बिजनेस में लगाता है और उसकी डाउनलाइन टीम में उसके जैसे ही 100  लोग हैं, तब समय के बहुगुणित होने के कारण, एक दिन में 200
घटे काम होगा, जो कि सप्ताह के 1400 घंटे होते हैं और महीने में 6000 घंटे .

          यह सिध्दांत हर एक व्यक्ति की कमाई पर भी लागू होता है, परंपरागत व्यापार में हर व्यापारी, फिर चाहे वो महान विक्रेता ही क्यों न हो, अपने चंद ग्राहकों द्वारा की गयी खरीददारी पर एक निश्चित प्रतिशत आमदनी ही पाता है, जबकि इस बिजनेस में एक व्यक्ति की डाउनलाइन मेंबहुत सारे लोग होते हैं, जो प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल भी करते हैं और विक्री भी . पारिणामस्वरूप, उसे इन लोगों द्वारा किए गए कारोबार में से भी कुछ। प्रतिशत की आमदनी होती हैं . दूसरे शब्दों में यह बिज़नेस अधिक आमदनी का माध्यम है, क्योंकि हमारी आमदनी हमारे नेटवर्क में शामिल असीमित लोगों की संख्या और उनके द्वारा की गयी विक्री तथा इस्तेमाल पर निर्भर होती है.

जिस पल से कोई व्यक्ति इस बिज़नेस में शामिल होता है, उसी पल से वह एक स्वतंत्र विज़नेस का मालिक (आइ.वी. ओ . ) बन जाता है. एक आइ . बी. ओ . स्पॉसरिंग करते हुए अपनी एक टीम का निर्माण करता है, जो व्यक्ति दसरे व्यक्ति को इस विज़नेस से जोड़ता है, वह उसका स्पांसर बन जाता है और अपलाइन के नाम से भी जाना जाता है.

         इस बिज़नेस में सफलता प्राप्त करने के लिए, नेटवर्क निर्माण के साथ ही, बिक्री करने में भी निपुण होना बहुत ज़रूरी है. नेटवर्किग करना एक आवश्यक कदम। है. हर रोज़ हम बहुत से लोगों से मिलते रहते हैं और इस बिजनेस को उन्हें समझाने का हमें अवसर मिलता है. हर एक व्यक्ति को 'शो द प्लान' पूरी तरह से सीख लेना चाहिए, क्योंकि इस बिजनेस के लिए यह बहुत ही जरूरी है कि अपने
पॉस्पेक्ट को यह विज़नेस समझाते समय, आप अच्छी तरह से उन्हें समझा सकें ।

                प्रॉडक्ट की विकी इस विज़नेस का एक ज़रूरी हिस्सा है, हर प्रॉडक्ट पर कुछ पॉइंट्स होते हैं, जो कि उसका उपयोग या विक्री करने पर हमारे कारोबार में गिने जाते हैं. प्रॉडक्ट्स के व्यक्तिगत उपयोग को अधिक बढ़ावा दिया जाता है, क्योंकि स्वयं उपयोग करने के बाद ही पॉडक्टस के सच्चे अनुभव की बात लोगों से पूरे विश्वास के साथ की जा सकती हैं, लोग तब आसानी से अपने आप ही पॉडक्टस खरीदने के लिए तैयार हो जाते हैं.

             हर आई.वी. ओ. के लिए एक अच्छा लीडर होना भी ज़रूरी है. कारण यही है, कि दूसरे लोगों को सफल होने में मदद करके ही, इस विजनेस में खुद सफलता हासिल की जा सकती है. हालांकि इस विज़नेस में सबसे बड़ा लाभ यही है, कि इसमें आप अपनी पसंद के हिसाब से अपने सहयोगी का चुनाव कर सकते हैं.

1)  नेटवर्क का निर्माण करना
वितरकों के नेटवर्क का निर्माण करते समय कुछ आधारभूत कार्य :

1)नामों की सूची बनाना

2)संपर्क और निमंत्रण

3)प्लान दिखाना

4)फोलोअप और फोलोथू

5)नए वितरकों के लिए विज़नेस की विधिवत शुरूआत



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Tuesday, April 16, 2019

पांचवां चरण :कार्य

                     पांचवां चरण :कार्य

"बड़े शब्दों की संगत अच्छे कर्मों के साथ दुर्लभ ही दिखायी देती है."
                                                                                                                                        चार्लोट व्हिटन

कर्म के विना सभी इच्छाएं, सपने, लक्ष्य, योजनाएँ, प्रार्थनाएँ, और विश्वास खो जाते हैं. प्रयास ही प्रगति है. हर सक्षम व्यक्ति को इस
सवाल का जवाब देना ही पड़ता है, “क्या में अपने सपनों और लक्ष्यों से संबंधित कार्य करने के लिए वास्तव में गंभीर हूँ?" आपके मज़बूत और
लगातार प्रयासों के ही परिणाम आपके इच्छित लक्ष्यों में दिखायी देते हैं. 

         यदि एक बार आपके पास अपने सपनों को साकार करने की सक्षम योजना है, तब आपको अपनी योजना पर सावधानी से अमल करने के लिए, केवल एक पक्का निर्णय लेने की आवश्यकता है, लेकिन उससे भी पहले अपने आप से यह सवाल करना जरूरी है, कि आप अपने सपनों को। पूरा करने के लिए कितने गंभीर हैं. यदि आपका जवाब सकारात्मक है, तो आपको आगे बढ़कर योजना के अनुसार कार्य में जुट जाना चाहिए. यदि आप इस विजनेस को आधे मन से करते हैं, तब निश्चित ही आप इसे आधे रास्ते में छोड़ भी देंगे . 

       नीचे दी हुई कहानी, योजना और प्रबल इच्छा के महत्व को समझाती है. राज और प्रकाश दोनों ही अपने कॉलेज के सर्वश्रेष्ठ धावक थे. राज हमेशा प्रथम आता था, परंतु एक दिन वह हार गया . प्रतियोगिता के बाद राज ने प्रकाश के पास आकर कहा, “आज तो तुमने कमाल कर दिया. आज से पहले मैंने कभी तुम्हें इतना तेज़ दौड़ते हुए नहीं देखा. इसपर प्रकाश ने जवाब दिया, “ आज भी तुम हमेशा की तरह प्रथम स्थान पाने के लिए ही दौडे थे. पर मैं तो दौड़ा था स्कॉलरशीप के पैसों के लिए, ताकि में कॉलेज की फीस भर सकें. यह बात बिल्कुल स्पष्ट है, कि उस दिन की दौड़ में दोनों की इच्छाओं की तीव्रता और जुनून में फर्क था, जिसके साथ वो आगे बढ़े थे, बस इसी बात ने दौड़ के नतीजे में फर्क पैदा किया - 

              काम करना पहली जरूरत है. अमल किए बिना आप सफलता प्राप्त नहीं कर सकते . अपने लक्ष्य के लिए प्रतिवद्ध रहिए। प्रतिबद्धताओं के बिना जीवन में कुछ भी सार्थक हासिल नहीं किया जा सकता .

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चौथा चरण : विश्वास

                          चौथा चरण : विश्वास

"सफलता पाने से पहले हमें विश्वास होना चाहिए, कि हम यह कर सकते हैं."

                                                                                                                                     - माइकल कोरडा



           कहा गया है कि सफलता का सबसे कठिन हिस्सा होता है, आपका यह विश्वास कि आप सफल हो सकते हैं. आपका विश्वास ही आपकी सफलता को निश्चित करता है. अगर आपको विश्वास नहीं है, कि आप किसी विशेष काम को कर सकते हैं, तब उस काम के लिए आप पूरा प्रयास नहीं कर पाते . परिणाम स्वरूप आपको कभी भी सकारात्मक परिणाम नहीं मिलते . विश्वास एक माध्यम है, इसलिए खुद पर विश्वास कीजिए और दूसरों पर भी विश्वास कीजिए. छोटा सा वाक्य में कर सकता हूँ !” वास्तव में एक शक्तिशाली वक्तव्य है , यह हमारे मन को मज़बूती देता है, क्योंकि यह हमारे इस विश्वास की स्वीकारोक्ति है, कि हम क्या कर सकते हैं. अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आपको यह विश्वास होना ही चाहिए, कि आप सफलता पाकर रहेंगे. डॉक्टर डेविड श्वार्टज़ अपनी पुस्तक “बड़ी सोच का बड़ा जादू" (Magic of thinking BIG) में। कहते हैं कि “कामयाब तो हर आदमी होना चाहता है ... विश्वास और सफलता के संबंध में ज्ञान की सबसे उपयुक्त वात वाइवल में कही गई है, कि आस्था से तो पहाडों को भी हिलाया जा सकता है... याने आप विश्वास से पहाड़ को भी हिला सकते हैं. आप सफलता जरूर पाएँगे, अगर अपने अंदर सफल होने का विश्वास जगाएंगे. मज़बूत विश्वास मन को प्रेरणा देता है, राह दिखाता है, तरीका सुझाता है और उपाय भी अपनी सफलता के लिए आपको आश्वस्त देखकर, लोग भी आपमें अपना विश्वास जताने लगते हैं ... सफल होने का विश्वास एक ऐसा आधार है, जो सफल लोगों के व्यक्तित्व का एक अभिन्न हिस्सा होता है."

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तीसरा चरण : योजना बनाना

                 तीसरा चरण : योजना बनाना 

जो योजना बनाने में विफल होता है, वो विफल होने की योजना बनाता है."
                                                       - एक कहावत


            पहले दो चरण, सपने और लक्ष्य, इस तीसरे चरण के लिए एक आवश्यक आधार का काम करते हैं. किसी भी चीज़ को हासिल करने की दिशा में बढ़ाया गया एक ठोस कदम है, योजना बनाना . योजना बनाए बिना, केवल सपने देखना, ख्याली पुलाव पकाने के समान होता है. किसी भी मंज़िल तक पहुँचने के लिए, वहाँ तक ले जाने वाले रास्तों का नक्शा पास में होना जरूरी होता है. योजना बनाने का मतलब है, अपने इच्छित लक्ष्य को पाने के लिए नक्शा तैयार करना . लक्ष्य पाने की बात को, तब तक सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, जब तक एक योजना, काम की रूपरेखा और समयबध्द कार्यक्रम नियोजित न किया जाए.

           लोगों की विफलता का कारण यह नहीं, कि लोग विफल होने की योजना बनाते हैं; बल्कि वो योजना बनाने में विफल होते हैं. विशेषज्ञों का कहना है, कि हममें से ज्यादातर लोग अपनी छुट्टियों की योजना बनाने के लिए कहीं ज्यादा समय बिताते हैं, जबकि उतना अपने भविष्य के लिए नहीं बिताते . उचित योजना के बिना आपके सपने अधूरे ही रहने के लिए शापित हैं.

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Sunday, April 14, 2019

दूसरा चरण : लक्ष्य

                       दूसरा चरण : लक्ष्य
"यदि किसी व्यक्ति को यह पता नहीं है, कि वह किस बंदरगाह की ओर जाना चाहता है, तब हवा का कोई भी रूख उसके लिए अनुकूल नहीं होता .
                                                                                                                                                    - सेनेका



     जैसे-जैसे किसी व्यक्ति के अंदर अपने सपनों को हासिल करने की इच्छा तीव्र होती जाती है, वैसे-वैसे उसके सपने उसके लक्ष्यों में
रूपांतरित होते जाते हैं. इस इच्छा के लगातार चलते प्रवाह के कारण, उलझन भरे सपने भी निश्चित लक्ष्यों में बदल सकते हैं. वास्तव में लक्ष्य याने वो इच्छाएँ और सपने ही हैं, जिनपर हासिल करने की तारिख डाल दी गई है. उन्हें पाने के लिए निर्धारित समय के हिसाब से, हम उन्हें विभिन्न श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं, जैसे कि अल्प, मध्यम और दीर्घ समय में हासिल किए जानेवाले लक्ष्य .

               अल्प समय में हासिल करने योग्य लक्ष्य है:

          आनेवाले कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों में आप अपने जिन सपनों को पूरा करना चाहते हैं, उनके लिए आप अल्पावधि लक्ष्य बना सकते हैं।छोटी अवधि के इन लक्ष्यों को निर्धारित करते समय अपने आप से नीचे लिखे गए सवाल पूछिए.

1) दरअसल आप क्या बनना चाहते हैं, क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं ?

2) उसके लिए आपको कितनी कीमत चुकानी पड़ सकती है ?

3) आप उसे कितनी जल्दी पाना चाहते हैं ?

       आपके सामने जो भी लक्ष्य हों, उन्हें वास्तविक रूप में महसूस कीजिए, उन्हें छू कर, लिख करके, उन्हें दुकानों में देखकर तथा उनक चित्रा ।को ऐसी जगह लगाकर, जहाँ वो आपको हरदम दिखायी देते रहे.

     मध्यावधि और दीर्घावधि लक्ष्य है

                  आनेवाले एक, दो या पांच सालों में आप अपने जिन सपनों को पूरा करना चाहते हैं, उनके लिए आप मध्यावधि या दीर्घावधि लक्ष्य बना। सकते हैं. इन लक्ष्यों को निर्धारित करते समय इन बातों का ख्याल रखिए.

1) आर्थिक विषयों में लचीलापन, कैरियर के विकल्प, स्वतंत्रता और स्वयं निर्धारित आमदनी के विषय में सोचते समय हमेशा बड़ा सोचिए.

2) आप इन लक्ष्यों को क्यों' पाना चाहते हैं ?

3) अपने लक्ष्यों तक पहुंच कर आपको कैसा महसूस होगा?

4) क्या आप वास्तव में गंभीर हैं और कितने गंभीर हैं ?

            यह आवश्यक है कि समयसमय पर अपने लक्ष्यों में सुधार करते रहना चाहिए, उन्हें पाने के लिए टाइमटेबल वनाइए, सभी लक्ष्यों को लिखकर उन्हें हमेशा अपनी नजरों के सामने ही रखिए. अपने कमरों की दीवारों, आइनों और फ़ीज़ इत्यादि पर उनको चिपका दीजिए, अपने जेब में रखी डायरी या प्लानर में भी इन्हें लिखकर रखिए, ताकि आप जब चाहें उन्हें देख सकें. हमेशा अपने लक्ष्यों को मन ही मन में पाया हुआ महसूस कीजिए, हासिल करने वाले लोगों में विशेषतौर पर यह बात होती है, कि वो अपने लक्ष्यों को निर्धारित करनेवाले होते हैं।

लक्ष्य निर्धारण के लिए दिशानिर्देश है:

1) लक्ष्य विशिष्ट होने चाहिए.

2)लक्ष्य लिखे हुए होने चाहिए.

3)आपके लक्ष्य वास्तविक होने चाहिए. इस बारे में अपनी अपलाइन से सलाह लीजिए।

4)हर लक्ष्य के साथ उसको पाने की एक निर्धारित तारीत होनी ही चाहिए।

5)अपने लक्ष्यों को हमेशा अपनी नज़रों के सामने रखिए. (तस्वीरों के रूप में फ्रीज, दीवार या आडने आदि पर ।

6) अपने लक्ष्यों में सुधार करत रिहए और समयानमार नए लक्ष्य बनाते रहिए ।

7) अपने लक्ष्यों को अल्पावधि, मध्यमावधि, तथा दीघावधि लक्ष्या में वांट दीजिए. (३-६ महिने याने अल्पावधि. १-२ साल याने मामावधि ।
और २-५ साल याने दीर्घावधि लक्ष्य .)

8) अगर आप विवाहित हैं, तो पतिपत्नी दोनों अपने सपनों की अलग सूची बनाइए, फिर इस योजना के लिए, एक दूसो की सहमति से, एक
अंतिम सूची बनाइए अव हर सपने के आगे हासिल करने की तारीख लिख लीजिए और साथ में पुरस्कार भी.

10) किसी लक्ष्य को प्राप्त करते ही, अपने आपको पुरस्कार अवश्य देना चाहिए.

पहला कदम :  आपको क्या चाहिए पहले ठान लीजिए.

यह पहला कदम बहुत ज़रूरी है.जब तक आप इस पहले कदम को सही तरीके से पूरा नहीं करते, तब तक बाकी योजना अर्थहीन है.अगर आप अपनी 'क्यों को ही नहीं जानते, तब 'कैसे' का मतलब ही नहीं रह जाता .

दूसरा कदम : 'प्लॅटिनम स्तर तक पहुंचने की एक स्पष्ट योजना बनाइए.

साथ में दिया गया टेवल इस योजना का एक हिस्सा है, जिसकी मदद से अगले साल में आप १0,000 पी. वी. के स्तर तक पहुँच सकते हैं. इस स्तर पर थोड़ा कम या ज्यादा समय में भी पहुंचा जा सकता है. आवश्यकतानुसार अपने पी.वी. के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आप स्वतंत्र हैं. हर लक्ष्य तक पहुँचने पर खुद को दिए जानेवाले पुरस्कार को
भी अवश्य लिख लीजिए.

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